Thursday, October 30, 2014

नूर ऐ इलाही मुझपे यू कर्म हुआ.... मेरा खुदा, नूर ऐ इलाही हुआ...... बादल

Saturday, October 25, 2014

रस्म-ऐ-चराग  महोब्त के, जलाऊँ कैसे....
दिल के जख्म महफिल मे, सुनाऊँ कैसे....
रोशन थी मेरी ख्वाबगाह जो तेरे वजूद से,
उस ख्वाबगाह को तुझ बिन, सजाऊँ कैसे....  बादल


Wednesday, October 8, 2014

मुझको तड़पा रहीं है , फिर ये चाँदनी रातें….
चाँद पूरा है मगर , तुम नज़र नहीं आते…. बादल


Saturday, October 4, 2014

यादों की तेरी लकीरे... मुझको तड़पा रहीं है ,
नहीं मिलन अब कोई... मुझको बतला रहीं है..... बादल


Thursday, October 2, 2014

मैं भी आज़ाद होना चाहता हूँ..... 
तुम्हारी तरह, इस बेरहम जिंदगी से..... बादल