Thursday, May 28, 2015

चहचहाते पंछी
कानों की प्यास बुझाती
उनकी मधुर आवाज़

हवा मे लहराती
उस बूढ़े पेड़ की
हर जवान साखा

पुदीने के खेत
उनकी ठंडी हवा
और मोहक खुशबू
यादे
आज भी मुझे
तुम्हारे गाँव खींच लाती है

अपनी जंगह
सब मौजूद हैं

नहीं है
तो तुम्हारा
छत पर वो सूखता दुपट्टा
खुशियों से सराबोर घर
छनकती पाजेब
खनकती चूड़ीयां
और गुनगुनाते हुए तुम

हाँ तुम


बादल


Tuesday, May 26, 2015

अदब बख्श दे मेरे लहजे को ए मौला.....

मेरे अपने दुआ मेरी पढे जाते है।   


बादल








Thursday, February 19, 2015

मेरी दुआ और प्यार......
दोनों मुकम्मल होने को तरसते हैं।

बादल 


Friday, February 13, 2015

माँ को नित प्रणाम करो, और दबाओ पाँव।
दुख भोगना नहीं पड़े, ऐसी माँ की छाँव।।
बादल


दिल्ली के दिल पर चले, खूब सियासी तीर।   
झेली पीड़ा तब मिला, इस प्यासी को नीर।।     
  बादल 

Sunday, January 25, 2015

कुछ मुस्क आज मेरे यार की फिजा मे है...... महसूस-ऐ-रूह तू कंही आस पास है। 

बादल            
         

Tuesday, January 20, 2015

अश्क हूँ मैं मुझसे तू यूँ प्यार ना कर,
देख खुद पे सितम तू यूँ बार-बार ना कर,
गिरती हैं रोज़ बिजलियाँ मुझपर मुफ़लिशि की,

मेरी गुरबत से ज़िंदगी तू यूँ तार-तार ना कर...... 
बादल