Tuesday, March 4, 2014

देखा है........

देखा है........

तेरे साए में खुदको महफूज देखा है,
तेरी आँखों में प्यार खूब देखा है....

झुकाके नज़रें फिर तेरा यूँ मुस्कुराना,
सच कंहू तेरे लबों पे अपना नाम देखा है....

दुआ करते हो रोज़ जिस परवरदिगार से,
उस दुआ मे शामिल मैंने खुदको देखा है....

खनकती है जब तुम्हारे हाथों की चूड़ियाँ,
उन चूड़ियों पे खनकते मैंने खुदको देखा है....  

जब ध्यान से सुनते हो मेरे हर्फो को,
तेरे लबो को उन्हें गुनगुनाते खूब देखा है....

बादल तो दीवाना था तेरा दीवाना ही रहेगा,
तेरी लकीरों मे दीदार मैंने खुदका देखा है....

नहीं ज़रूरत किसी इक़रार की इस इबादत को,
तेरे प्यार को रगो में उतरते खूब देखा है….

बादल

Tuesday, January 21, 2014

सर्द हवाएँ________बादल


सर्द हवाएँ मुझे कुछ यू रुला गयी….
कुछ यादे तो...कुछ दर्द बढ़ा गयी….
बिखरे पत्तो सी थी जो ज़ज्बात की बाते,
पुराने खत्तों से...सब याद वो दिला गयी….


बादल


Friday, December 27, 2013

याद आता है…............बादल

तुझसे ज्यादा तेरा वो दर्द याद आता है
हर शब्द और वो वादा याद आता है….
माफ़ कर देता गुनाह तेरे सारे मगर
फकीर के वेश मे वो रकीब याद आता है


बादल 

Sunday, October 13, 2013

Nazar aata hai tu________Baadal


नज़र आता है तू_________बादल

रह रह के क्यूँ हर लम्हा याद आता है तू…..
फलक तो क्या हर ज़र्रे मे नज़र आता है तू….

बेकरारी हो या तड़प ये एतबार नही आता,          
बिखरती धूप मे हर रोज़ नज़र आता है तू….

खुदा कंहू या खुदाई समझ नही आता,
हर बात और नज़र मे नज़र आता है तू….

हर नाकाम कोशिश हुई और भुला नही जाता,
जंवा हर मुस्कुराहट मे नज़र आता है तू….

महोब्बत हो या इबादत मगर सकु नही आता,
सजदे के हर फूल मे नज़र आता है तू….

ग़ज़ल कंहु या रुबाई ये फ़ैसला हो नही पाता,
हर धड़कते दिल और जिंदगी मे नज़र आता है तू….

प्यासा तेरा हू ये सहरा ख़तम नही होता,
रात रोशन हर दिए मे नज़र आता है तू….


बादल

Tuesday, October 8, 2013

तन्हा खुशी________बादल


 तन्हा खुशी________बादल

सुर्ख आँखो को अपने अश्क़ों से धो लिया,
लहू जितना भी था उसे शब्दो में पिरो लिया,
चलते रहे जिंदगी के कदमो को हम यू ही...
इस तरह उम्र का एक पड़ाव हमने सँजो लिया,

खुशी दिखी कही तो बादल तन्हा मुस्कुरा लिया,
पढ़ अपने उकेरे शब्दो को खुद को बहला लिया,
बीते लम्हात हम याद करके फिर बैठे रहे यू ही...
जवानी का हर पल अपने प्यार पे ऐसे ही लूटा लिया,


बादल


Friday, October 4, 2013

इंतज़ार_________ बादल

अंजान राहो से भी तेरे लौट आने का इंतज़ार था,
यादे धुंधली हो रही थी मगर चेहरा याद था,
भीड़ लाखो की थी और तेरे पुकारने का इंतज़ार रहा....
हर सावन भूलता गया मगर पतझड़ याद था,

हर अजनबी आहट पे तेरे संदेशे का इंतज़ार था,
बादल खुदा को भुला मगर तेरा नाम याद था,
जिंदगी की ढलती शाम को तेरी सांसो का इंतज़ार रहा.....
जख़्मो का दर्द भुला मगर मिलो का सफ़र याद था,


बादल


Thursday, September 26, 2013

अश्क______________बादल

अश्क

अशकों को मेरे छू के तो देखो,
मेरे हर दर्द का अहसास हो जाएगा....
छोड़ गये थे जिन अंजान राहो मे,
उन राहो के वीरानो का अहसास हो जाएगा….

मत समझना इन्हे सिर्फ़ पानी की कुछ बूंदे,
इनमे घुले मेरे लहू का अहसास हो जाएगा….
कैसे बीती हर रात सिसकीओ से भरी,
ये जान के तुम्हारा आँचल भी भीग जाएगा….

इन्हे सिर्फ़ अश्क भी समझने की भूल ना करना,
बेवफ़ाई और प्यार क्या है ये अहसास हो जाएगा….
अमृत है ये तो दर्द ,बेवफ़ाई और रुसवाई के मंथन का,
तुमने क्या खोया और क्या पाया ये अहसास हो जाएगा….

अशकों को मेरे छू के तो देखो,
ये जान के तुम्हारा आँचल भी भीग जाएगा….


बादल