कुछ मुस्क
आज मेरे यार की फिजा मे है...... महसूस-ऐ-रूह तू कंही आस पास है।
बादल
Tuesday, January 20, 2015
अश्क हूँ मैं मुझसे तू यूँ प्यार ना कर,
देख खुद पे सितम तू यूँ बार-बार ना कर,
गिरती हैं रोज़ बिजलियाँ मुझपर मुफ़लिशि की,
मेरी गुरबत से ज़िंदगी तू यूँ
तार-तार ना कर......
बादल
Friday, January 16, 2015
ठिठुरती रात की अब ठिठुरन नहीं जाती,
तेरे बेगैर नींद अब रात
नहीं आती,
बदलते रहते है करवठ तुझे सोच-सोच
कर,
मगर ज़ालिम रात की सहर नहीं आती।
बादल
Monday, December 22, 2014
मेरे अशकों की दास्ता... सब पूछते रहते है,
और दर्द मे हम अपने... सुलगते रहते है,
छुपा लिया खुदकों उन्होने, कफन के पीछे जबसे,
परछाइयों मे भी... हम उन्हे ढूंड्ते रहते है..... बादल