Wednesday, August 6, 2014
Saturday, August 2, 2014
तन्हा__________बादल
मेरी जुबां से…
जो सुनना चाहते हो तुम,
फकत कुछ शब्दो के सिवा…
अब उनका कोई वजूद नही है,
बात तो तब होती…
जब खुद महसूस कर पाते…
शांत बादल के ,
अन्तर्मन की वो लांखों वेदनाएं…
दम तोड़ती…
वो इंतज़ार मे आँखे,
वो सावन की जलन…
अस्क़ो को बूँदो मे छुपाता मन…
हर रात …
सन्नाटे मे सिसकिओ का गूंजना,
तड़प की आह पर...
वो तेरे नाम का निकलना…
तेरी तस्वीर से…
खूब सारी शिकायत करना,
दिन रात का वो…
तेरे लिए दुआएँ माँगना,
क्या बताने पर…
ये सब समझ पाओगे,
बोलो वादा करोगे…
फिर तन्हा छोड़ के ना जाने का,
बादल
Monday, July 28, 2014
Saturday, July 26, 2014
रुसवाई____________ बादल
तेरी
खामोशी रुसवाई मेरी बन गयी,
तुझबिन जीने
की वजह वो बन गयी….
सज़ा
रखे थे, जो लांखों हसीन ख्वाब,
उनकी बेदर्द कातिल, नज़र तेरी बन
गयी….
पहले
जानते तो रखते बात अपनी हद तक,
तेरी ये
बात, मेरी जग हसाई बन
गयी….
इबादत
के रूप मे महका था जो प्यार,
उसकी
डोर टूटने की वजह तुम बन गयी….
नही
मंजूर था, तो एक इशारा ही कर देते,
मायूस
लोटना तेरे घर से, जिंदगी मौत बन
गयी….
सज़ा
लोगे तुम, चाँद तारो सी गैर संग
जिंदगी,
रोशनाई
मगर बादल की पूरी ज़िंदगी बन गयी….
बादल
Monday, May 19, 2014
जिंदगी..................बादल
कुछ बिखरे शब्दो सी लगती है जिंदगी,
नही मायूस पर उदास सी लगती है जिंदगी,
वहम है या ये मौसम का असर है,
बादल हूँ फिर भी प्यासी सी लगती है जिंदगी......
बादल
Tuesday, April 8, 2014
सफर__________बादल
अश्क़ों से हर्फो का सफर तय कर लिया,
जबसे तन्हा रहने का फैसला हमने कर लिया….
तमाशा बन गए थे जिस अपने के लिए,
उसकी बज्म से खुदकों रुकसत कर लिया....
मोहब्बत देके नाम उसकी, जफाओ को,
हमने खुदको जमाने मे बदनाम कर लिया....
दर्द-ए-जिंदगी की गलियो की ठोकरे छोड़,
खुदा के दर को हमने अपना घर कर लिया....
नहीं दिखाई देगा अब कोई फरेबी अक्स,
हर दरो दीवार से हमने पर्दा कर लिया....
कोरे कागज पर भी नज़र आते है मेरे अल्फ़ाज़,
जबसे लहू को अपने रोशनाई हमने कर लिया....
बादल
Tuesday, March 4, 2014
देखा है........
देखा
है........
तेरे
साए में खुदको महफूज देखा है,
तेरी आँखों में
प्यार खूब देखा है....
झुकाके
नज़रें फिर तेरा यूँ मुस्कुराना,
सच कंहू तेरे लबों पे
अपना नाम देखा है....
दुआ
करते हो रोज़ जिस परवरदिगार से,
उस दुआ मे शामिल
मैंने खुदको देखा है....
खनकती
है जब तुम्हारे हाथों की चूड़ियाँ,
उन चूड़ियों पे
खनकते मैंने खुदको देखा है....
जब ध्यान से
सुनते हो मेरे हर्फो को,
तेरे लबो को उन्हें
गुनगुनाते खूब देखा है....
बादल तो दीवाना था
तेरा दीवाना ही रहेगा,
तेरी लकीरों मे दीदार
मैंने खुदका देखा है....
नहीं
ज़रूरत किसी इक़रार की इस इबादत को,
तेरे
प्यार को रगो में उतरते खूब देखा
है….
बादल
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