Thursday, August 1, 2013

चंद अल्फ़ाज़........बादल



चंद अल्फ़ाज़ कह के मै चला जाऊंगा
कुछ अश्क तेरी आंखो मे छोड़ जाऊंगा
सुर्ख आंखो से बहुत उठ चुका
तेरे जख्म तुझे ही सौगात मे दे जाऊंगा...

छिपाया था जिस से बेवफ़ाई को तुमने
उस खूबसूरत हंसी पे मायूसी छोड़ जाऊंगा
सौगात तो तुम्हें क्या देगा ये बदनसीब बादल
तोहफे मे बस आईना तुझे दे जाऊंगा...

अभी तो घुल रही है झूठ की मीठी बाते
उम्र के मोड पे कभी तो सच सामने आएगा
हुस्न...फरेब...दौलत जब नहीं होंगे साथ तेरे
उस रोज़ मै अपनी पूरी कहानी तुझे सुना जाऊंगा...

चंद अल्फ़ाज़ कह के मै चला जाऊंगा
तेरे जख्म तुझे ही सौगात मे दे जाऊंगा...


बादल


Tuesday, July 23, 2013

एतबार________बादल


कुछ पल ही सही मेरा इंतज़ार तो कर ले ,
दूर तलक ना सही...कुछ कदम तो साथ चल ले...
टूटा पत्ता हूँ साख का तुम्हारी ही तरह ,
खुद पे ना सही मेरा एतबार तो कर ले ...

भीग ले साथ मेरे मदमस्त सावन मे ,
फिर छोड़ अश्क़ों को खुशी को गुलजार कर ले...
देख लेना फिर लौट आएँगी बहारे प्यासी धरती पे ,
तू बादल को आजमाने का इरादा तो कर ले...

कब तक रखोगे इस जमी को यू बंजर ,
एक नन्हा पोधा तू इस पे अंकुरित कर ले...
हटा के बबूल के कांटे अपने आंचल से ,
तू झोली अपनी खुशीओ के चिरागो से भर ले...

भुला के जमी और आश्मा की दूरी को ,
बस यकी अपने होसले का एक बार कर ले...
बना के एक नया इतिहास तू साथ मिलके ,
फलक और जमी को रोशन तू कर ले...

खुद पे ना सही मेरा एतबार तो कर ले ...
बस यकी अपने होसले का एक बार कर ले...


बादल

Monday, July 15, 2013

वफा करने की सजा....

तुमने क्या समझा.....
जो इतना सितम करते चले गए,
मुझे पत्थर समझा था क्या....
मै भी तो इंसान ही था
कोई साया थोड़े ही था जिसे दर्द ना महसूस हो...

वफा करने की सजा....
कोई भला ऐसे देता है क्या,
राह के बीच अपने को कोई,
इस तरह भी छोड़ देता है क्या.....

मै तो तलबगार सिर्फ अपनेपन का ही तो था.....
फिर कहा रखा तुमने वो अपनापन,
बताओ तो किसने छिन लिया उसे तुमसे....

ऐसा भी क्या.....
जिसकी वजह से...
सूने अंधियारों मे मुझे तड़पता छोड़ दिया....

मेरी खामोश निगाहों और उदास चेहरे,
को देखकर भी
कैसे तुम चले गए थे.....

यही ना के.....
खुद बे खुद
ये अपना अस्तितव मिटा लेगा.....

मगर तुम कितने गलत थे.......

देखो....तुम्हारे दिये जख्मो ने
आज मुझे कितना मजबूत बना दिया है,
उन अंधियारे गलियारो को मैंने
रोशन कर लिया है......

अब कोई दर्द नहीं देता मुझको,
क्योकि अपने और परायों को....
मैंने पहचान जो लिया है...........



बादल


Monday, June 17, 2013

आखरी मुलाकात________________बादल



चलो आज एक आखरी मुलाकात कर लेते हैं
फिर जिंदगी के इस किस्से को तमाम कर देते हैं
वो खुशी वो आंसू वो तड़प वो बेबसी वो मायूसी
सिर्फ एक बार तुम संग फिर से याद कर लेते हैं
नही मंजूर ये रिश्ता समाज के ठेकेदारों को
अनकही बातों को चलो हम आज कह देते है
यूं तो महसूस करता हूं मै तुम्हारी खामोशी भी
चलो मिलकर आज खामोशी को गुनगुना लते हैं
फैसला हो ही चुका है जब हमारी किस्मत का
सिर्फ एक बार किस्मत पे हम संगसंग रो लेते हैं
फिर कुछ पल ही सही लौटा सकूं मुस्कुराहटें तुम्हारी
चलो फिर कुर्बान हम अपनी हस्ती कर देते है,.........बादल



चाँद_____________.बादल



कोई कहता है नादान मुझको
कोई मुझको दीवाना कहता है,...
बादल के मन को छू लिया जिसने
उस चाँद पे इतराना अभी बाकी है..........,..
दीदार रोज किया है उसका
बस उसे पाना अभी बाकी है,..
बहुत छू लिया उसके अक्स को
आँगन मे उसे उतारना अभी बाकी है..........
तड़प रहा हूं पल पल जिस मिलन को
उसे ये प्यार जताना अभी बाकी है...........
इंतज़ार है जिसका पलके बिछाये
वो पल जिंदगी में आना अभी बाकी है,....
बहुत निहार लिया दूर दूर से उसको
अब बस इस दूरी को मिटाना बाकी है..
बहुत रह लिया तनहा तनहा "वो" चाँद
उसे सितारो से चुराना अभी बाकी है.........बादल



Sunday, June 16, 2013


पाऊंगा..............

मैं दूर जाना चाहता हूं 
बस एक उम्मीद है 
सुकुन भरी चंद सांसे तो ले पाऊंगा,..
दिए प्यार के तोहफे में 
जो दर्द और जख्म 
कहीं तो मैं उन्हे भुला पाऊंगा,..
मिटा दिया है जिस मासूम हंसी को 
मेरे लबों से तुमने 
शायद उसे फिर से लौटा पाऊंगा,...
अश्कों से भिगा के वीरान किया था 
जिन आंखों को 
शायद वही चमक उनकी फिर लौटा पाऊंगा,...
माना दुनिया जालिम है मगर 
कहीं तो वो सुकूं मिलेगा 
जहां अपने जख्मों को मैं मिटा पाऊंगा,....

बादल


Thursday, June 13, 2013

सावन_________बादल


बड़ा मुश्किल है
तनहा जीवन का सफर
जो तू साथ होता तो
आसानी से कट जाता ......
पहली बार ऐसा हुआ
कि तू खो गया है कंही
पर कहां गया तू
दुनिया की भीड़ तो है वही…..
इस तरह मुझसे दूर जाने का
तेरा कोई इरादा न था,..
ऐसे कैसे तू बदल सकता है
यूं भुला देने का भी कोई वादा न था,..
ये किस मुकाम पे खड़ा हूं मैं...
जहां ना तेरा वजूद है
ना तेरा साया है
ना जो चाही थी वो छाया है
मैं हूं वंही जंहा छोड़ा था तुमने
वापिस आने का करके वादा
अब तुम लौट भी आओ
देखो ना,....सावन फिर लौट आया है ………
बादल